
फतहनगर। रियासतकालीन परम्परा को याद दिलाने वाली बादशाह की सवारी का आज सनवाड़ में आयोजन किया गया। प्रति वर्ष शीतला सप्तमी के अवसर पर बादशाह की सवारी निकाली जाती है। दिनभर होली खेलने के बाद शाम को बादशाह की सवारी का आयोजन किया गया। सदर बाजार में चारभुजा मंदिर के यहां से बादशाह की सवारी सज्जित की गयी। बग्घी में बादशाह एवं उसके दोनों ओर बेगम को विराजित किया गया तथा बैंडबाजों के साथ बादशाह की सवारी को रवाना किया गया। बग्घी के आगे दो लोक कलाकार नृत्य करते हुए एवं उसके आगे बादशाह की सेना चल रही थी। बादशाह की सेना के पास आक्रमण को रोकने के लिए लकड़ी का विशालकाय अवरोधक भी था जिसके जरिए दुश्मन के आक्रमण को विफल किया जा सकता है। रास्ते में महाराणा की सेना अलग-अलग सेनापतियों के नेतृत्व में छापामार हमले कर रही थी। एक बार में एक ही सेनापति नेतृत्व प्रदान करता है। बादशाह की सेना एवं महाराणा की सेना के बीच अच्छी रस्सा कस्सी चली। बादशाह की सेना आराम से मेवाड़ी सेना को परास्त करते हुए आगे बढ़ रही थी। बीच रास्ते में महाराणा की सेना द्वारा जोरदार धावे बोले गए। इस दौरान रस्सा कस्सी में कई लोग नीचे भी गिरे लेकिन कार्यक्रम सौहार्दमयी वातावरण में चलता रहा। बादशाह की सेना जैसे ही रावला चैक मं पहुंचती है,मेवाड़ी सेना के जारदार हमले में वह परास्त होकर हथियार डाल देती है। बादशाह की दाढ़ी नोंच ली जाती है तथा बादशाह को पकड़ लिया गया। बाद में नगरवासियों ने गैर नृत्य किया। रावले में जन सैलाब इतना था कि कार्यक्रम देखने के लिए लोग रावले के गोखड़ों तक पर चढ़ गए। रावले के प्रमुख राणावत परिवार ने नगरवासियों का प्रवेश के दौरान पुष्पवृष्टि कर स्वागत किया। बादशाह की सवारी के इस कार्यक्रम में विधानसभा प्रभारी कृष्णगोपाल पालीवाल,पालिका उपाध्यक्ष एवं भाजपा मण्डल अध्यक्ष नीतिन सेठिया,पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेश चपलोत,मनोहरलाल चपलोत,सुनिल डांगी, पार्षद मनोहरलाल त्रिपाठी,नरेश जाट,शिव कुमार शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा सभी समाज के लोग मौजूद थे। रावले में स्थापित प्रभु श्री एकलिंगनाथ की गादी की पूजा करके नजराना पेश करने की रस्म अदायगी सम्पन्न करवाई गई। बादशाह की सवारी को देखने के लिए सनवाड़ के अलावा फतहनगर एवं आस पास के गांवों से भी बड़ी तादाद में लोग सनवाड़ पहुंचे। पुलिस जाब्ता कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहा।
अनुशासित होता है यह आयोजनः हालांकि आयोजन के मद्देनजर पुलिस जाब्ता भी तैनात रहता है लेकिन इस आयोजन में सभी लोग अनुशासित रह कर इस पुरानी परम्परा का निर्वहन करते हैं। वर्षों से चल रही इस परम्परा के आयोजन के दौरान कभी विवाद की स्थिति पैदा नहीं हुई। सभी लोग सद्भाव एवं प्रेमपूर्वक इसे मनाते हैं।
